175 साल पुराने मंदिर की खुदाई में सामने आया होलकर राजवंश का रहस्य

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Source: bhaskar.com

चूने और पत्थर से बनी 12 फीट ऊंची ये सुरंग सड़क के दूसरी तरफ बने होलकर राजाओं के दरबार राजबाड़े तक जाती है।

सुरंग गोपाल मंदिर से राजबाड़ा तक बनी है। इनसेट में सुरंग।

इंदौर। होलकर राजवंश द्वारा बनवाए गए 175 साल पुराने गोपाल मंदिर की खुदाई के दौरान एक ऐसा रहस्य सामने आया है, जिसे देख लोग हैरान रह गए। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए चल रही खुदाई में पत्थरों से बनी एक पक्की सुरंग निकली है। चूने और पत्थर से बनी 12 फीट ऊंची ये सुरंग सड़क के दूसरी तरफ बने होलकर राजाओं के दरबार राजबाड़े तक जाती है। जानकारों के मुताबिक़ इस सुरंग का निर्माण आपात स्थिति में सुरक्षित निकलने के लिए किया गया था। इसका उपयोग गोपनीय दस्तावेज भेजने और और जासूसी काम के लिए भी किया जाता था।

– राजबाड़ा क्षेत्र में बने गोपाल मंदिर का निर्माण 1832 में होलकर घराने की कृष्णाबाई होलकर ने करवाया था। वे भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त थीं। मराठा वास्तुकला से बने इस मंदिर के निर्माण में उस जमाने में करीब 80 हजार रुपए लगे थे। 58 हजार वर्गफीट जमीन पर बने इस मंदिर में के एक भाग में अन्नक्षेत्र भी था। मंदिर के ठीक सामने होलकर राजाओं का दरबार यानी राजबाड़ा था। राजबाड़े का दक्षिणी भाग क्षतिग्रस्त होने के बाद इसका पुनर्निर्माण का कार्य भी इसी समय यानी 1832 से 1833 के बीच हुआ था।
– स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत प्रशासन ने गोपाल मंदिर के सौन्दर्यीकरण की योजना बनाई है। इसके लिए मंदिर मे बने दो निर्माण की खुदाई चल रही है। अन्नक्षेत्र के पास के हिस्से में खुदाई के दौरान अचानक मजदूरों को पत्थर की एक दीवार नजर आई। यह देख उन्होंने निर्माण कंपनी के सुपरवाइजर लखन सिंह को को बुलाया। उन्होंने उन्हें दीवार बचाकर खुदाई करने का निर्देश दिया। मजदूरों ने जब दीवार के पास के हिस्से में खुदाई की तो करीब 10 फीट जमीन खोदने के बाद एक रहस्यमयी सुरंग सामने आई।
– सुरंग दोनों तरफ चूने और पत्थर की दीवारों से बनी हुई है। इसकी चौड़ाई करीब 7 फीट और उंचाई 12 फीट है। सुरंग की बनावट इतनी मजबूत है कि इसे देखकर लगता है कि इसे किसी ख़ास मकसद से बनाया गया था। मंदिर के ठीक समाने राजबाड़ा है जानकारों के मुताबिक़ ये सुरंग राज दरबार के रहस्य का एक हिस्सा है। पिछली कई पीढ़ियों से मंदिर में पूजा का काम देख रही लता अरुण बताती है कि ये सुरंग मंदिर के निर्माण के समय की ही है। उनके मुताबिक़ सुरंग का एक हिस्सा राजबाड़ा में दरबार के एक गुप्त कक्ष में जाकर खुलता है।
– सुरंग देखकर लगता है कि इसका निर्माण किसी आपात स्थिति में बचाकर निकलने या किसी गुप्त उद्देश्य के लिए किया गया था। कुछ लोगों का कहना है कि ये सुरंग राजबाड़ा के साथ होलकर राजाओं के महल लालबाग पैलेस से भी जुडी हुई है। फिलहाल पुरातत्व विभाग इसकी जांच कर रहा है जांच के बाद इस सुरंग का पूरा रहस्य सामने आ जाएगा।

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