अस्थमा, कैंसर रोगियों लिए के वरदान है जिमीकंद

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Source: naidunia.jagran.com

जिमीकंद का उल्लेख आयुर्वेद में मिलता है। यह एक तरह से भूमिगत सब्जी है। भारत के अलग-अलग राज्यों में जिमीकंद को ओल या सूरन के नाम से जाना जाता है। जिमीकंद एक सब्जी ही नहीं बल्कि बहुमूल्य जड़ी-बूटी है।

जिमीकंद की जड़ औषधि के रूप में प्रयुक्त होती है। पेट से जुड़े रोगों के लिए इसका सेवन रामबाण की तरह होता है। यह दिमाग तेज करने में भी मदद करता है। जिमीकंद खाने से एकाग्र शक्ति बढ़ती है। साथ ही यह अल्जाइमर रोग होने से भी बचाता है।

कैंसर के रोगी के लिए वरदान
जिमीकंद में फायवर-विटामिन-सी, बी6, बी1, फोलिक एसिड के अलावा पोटेशियम आयरन, कैल्शियम मैग्नीशियम और फॉस्फोरस पाया जाता है। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट विटामिन-सी और बीटा कैरोटिन कैंसर का कारण बनने वाले फ्री-रेडिकल्स से लड़ते हैं और गठिया आस्थमा रोग को जड़ से मिटा देते हैं।

ऐसे लोग जिमीकंद न खाएं
आयुर्वेद के अनुसार जिमीकंद उन लोगों को नहीं खाना चाहिए, जिनको किसी भी प्रकार का चर्म रोग हो। जिमीकंद ड्राई, कसैला, खुजली करने वाला होता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

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