रमा एकादशीः इस दिन से शुरू होगा देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सिलसिला, जानें कैसे करें पूजा

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Source: amarujala.com

DIWALI 2017 Benefits of rama ekadashi fast and importance of maa lakshmi and lord vishnu worship

माना जाता है कि दिवाली पर अगर मां लक्ष्मी की पूजा भगवान विष्‍णु के बगैर की जाती है तो पूजा का फल नहीं मिलता। दीपावली पर देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का स‌िलस‌िला कार्त‌िक कृष्‍ण एकादशी के द‌िन से शुरू हो जाती है।  इसल‌िए इस एकादशी का शास्‍त्रों में बड़ा महत्व बताया गया है। इस एकादशी का महत्व इसल‌िए भी अध‌िक है, क्योंक‌ि चतुर्मास की यह अंत‌िम एकदशी है। भगवान व‌िष्‍णुकी पत्नी देवी लक्ष्मी ज‌िनका एक नाम रमा भी हैं उन्हें यह एकादशी अधिक प्रिय है, इसल‌िए इस एकादशी का नाम रमा एकादशी है। ऐसी मान्यता है क‌ि इस एकादशी के पुण्य से सुख ऐश्वर्य को प्राप्त कर मनुष्य उत्तम लोक में स्‍थान प्राप्त करता है। इस वर्ष यह एकादशी 15 अक्टूबर रविवार के द‌िन है।

पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति इस एकादशी के द‌िन लक्ष्मी नारायण का ध्यान करते हुए व्रत रखते हैं, वह पूर्वजन्म के पापों से मुक्त होकर उत्तम लोक में जाने के अधिकारी बन जाते हैं। इस व्रत में तुलसी की पूजा और भगवान  विष्णु को तुलसी पत्ता अर्पित करने का बड़ा महत्व बताया गया है। जो व्यक्ति यह व्रत नहीं भी रखते हैं, वो भी इस दिन ‌विष्णु जी को तुलसी का पत्ता अर्पित करेंगे तो उन्हें भी पुण्य मिलता है।

रमा एकादशी की कथा के अनुसार एक बार राजकुमार चन्द्रसेन अपने ससुराल गए, जहां हर कोई एकादशी का व्रत करता था। ससुराल वालों के कहने पर इन्होंने भी ये व्रत रख तो ल‌िया, लेक‌िन भूख प्यास सहन नहीं होने के कारण इनकी मृत्यु हो गई, लेक‌िन एकादशी के पुण्य से इन्हें अप्सराओं के साथ सुंदर नगरी में रहने का अवसर म‌िला। वहीं पत‌ि की मृत्यु से दुखी होकर इनकी पत्नी भगवान व‌िष्‍णु की उपासना में लीन रहने लगी।

एक द‌िन चन्द्रसेन की पत्‍नी चंद्रभागा को इस बात की जानकारी म‌िली कि उनके पत‌ि को रमा एकादशी के पुण्य से उत्तम नगरी में स्‍थान म‌िला है, लेक‌िन पुण्य की कमी से उन्हें जल्‍दी ही इस नगरी से जाना होगा। चंद्रभागा ने ऋष‌ि वामदेव की सहायता से अपने पुण्य का कुछ भाग अपने पत‌ि को दे द‌िया और स्वयं भी पत‌ि के पास पहुंच गई।

इस एकादशी व्रत को जो लोग रखते हैं, उन्हें सुबह लक्ष्मी नारायण की पूजा करनी चाह‌िए और भगवान व‌िष्‍णु को तुलसी एवं देवी लक्ष्मी की लाल पुष्प से पूजा करनी चाह‌िए। अगले द‌‌िन द्वादशी को ब्राह्मण को भोजन करवाकर स्वयं भोजन करना चाह‌िए।

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