छठ पर्व: जानिए पूजा की संपूर्ण विधि और शुभ मुहूर्त

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Source: religion.bhaskar.com

24 अक्टूबर को शुरू हो रहा छठ पर्व चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत भाई दूज के तीसरे दिन से हो जाती है।

छठ पर्व: जानिए पूजा की संपूर्ण विधि और शुभ मुहूर्त

दिवाली का त्योहार खत्म हो गया है। इसके बाद आता है सूर्य भगवान की पूजा का त्योहार यानि छठ पूजा। यह पूजा चार दिन तक चलती है जो काफी कठिन होती है। छठ का यह त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है – एक बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक मास में।

छठ पर्व पर 4 दिन की पूजा

छठ पर्व चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत भाई दूज के तीसरे दिन से हो जाती है। इन चार दिनों में व्रत रखने वाले लोग 36 घंटे व्रत रखते हैं और पानी तक नहीं पीते। इस लिहाज से यह व्रत बड़ा ही कठिन है।

पहला दिन – नहाय खाय

छठ पर्व का पहला दिन ‘नहाय खाय’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सुबह उठकर पहले घर की अच्छी तरह से सफाई की जाती है और फिर व्रती महिलाएं और पुरुष नहा-धोकर, शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं। इसके बाद व्रत की शुरुआत होती है। इस दिन पहले व्रती महिलाएं और पुरुष भोजन ग्रहण करते हैं और बाद में घर के बाकी सदस्य। भोजन में इस दिन चने की दाल और कद्दू-चावल खाने की परंपरा है।

दूसरा दिन – खरना

छठ पर्व का दूसरा दिन ‘खरना’ के रूप में मनाया जाता है। इसमें व्रती दिन भर उपवास रखने के बाद शाम को भोजन ग्रहण करते हैं, जिसमें गन्ने के रस ने बनी खीर, घी चुपड़ी रोटी और चावल का पिट्ठा बनाया और खाया जाता है। इस भोजन में ना तो नमक का प्रयोग किया जाता है और ना ही चीनी का।

तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य

तीसरे दिन प्रसाद की तैयारी की जाती है। इसमें ठेकुआ, चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। सांचा और फल भी प्रसाद के रूप में रखे जाते हैं। शाम को बांस की एक टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है। इसके बाद व्रती के साथ घर के बाकी सदस्य और लोग अस्त होते सूर्य को
अर्घ्य देने के लिए घाट पर जाते हैं। यहां सभी व्रति सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य देते हैं। इसके बाद प्रसाद भरे सूप से छठी मैया की पूजा की जाती है।

चौथा दिन – उषा अर्घ्य

चौथे दिन उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान वही लोग व्रती के साथ फिर से घाट पर एकत्रित होते हैं जिन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था। तीसरे दिन की पूजा प्रक्रिया को फिर से दोहराया जाता है जिसके बाद सभी लोग घर वापस आ जाते हैं और पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं। इसके बाद व्रती प्रसाद खाकर या फिर कच्चे दूध का शरबत बनाकर उसे ग्रहण करते हैं और अपना व्रत पूरा करते हैं।

छठ पूजा का मुहूर्त और तिथि

सूर्योदय – 06:41 बजे
सूर्यास्त – 18:05 बजे
छठ पूजा की तिथि प्रारंभ – 24 अक्टूबर
छठ पूजा तिथि समाप्त – 27 अक्टूबर

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