10 दिन तक लाश को जिंदा करने में लगे रहे पादरी

7

Source: navbharattimes.indiatimes.com

family keeps son's corpse in church, offers prayers for 10 days to bring him back to life

10 दिन तक लाश को जिंदा करने में लगे रहे पादरी

अरविंद त्रिपाठी, मुंबई
कैंसर से 17 साल के एक युवक की मौत हो गई। लेकिन मौत के बाद 10 दिन तक चर्च में टोटका करके उसे जिंदा करने की कोशिश की जाती रही। पुलिस के दो बार दबाव बनाने के बाद आखिरकर युवक का अंतिम संस्कार किया गया।

पुलिस के अनुसार, मुंबई के चिंचपोकली इलाके में रहने वाले युवक मिसाख नेवहिस की 27 अक्टूबर को कैंसर से मौत हो गई थी। लेकिन उसके माता-पिता का मन नहीं माना और वे अपने बेटे को लेकर आखिरी उम्मीद के साथ नागपाडा स्थित जीसस फॉर ऑल नेशंस चर्च के पादरी के पास ले गए। पादरी ने मिसाख को जिंदा करने का आश्वासन दिया और 7 दिन तक चर्च के अंदर तमाम प्रार्थनाएं और तरह-तरह का पूजा-पाठ होता रहा।

जब इसकी भनक नागपाडा पुलिस को लगी, तो उन्होंने परिवार को समझाया और बेटे का अंतिम संस्कार करने को कहा। मिसाख के माता-पिता इसके लिए तैयार हो गए। हालांकि पुलिस के वहां से जाते ही वे बेटे का शव लेकर अंबरनाथ के एक और चर्च में पहुंच गए। यहां भी 3 दिन तक वही कोशिशें होती रहीं। पुलिस को दोबारा हस्तक्षेप करना पड़ा। इस बार पुलिस के दबाव के बाद मिसाख को दफनाया गया।

सूत्रों के अनुसार, पादरी के कहने पर ही माता-पिता ने बेटे के शव को नहीं दफनाया था। चर्च ने भरोसा दिया था कि मिसाख को जिंदा कर दिया जाएगा। अंधश्रद्धा फैलाने के मामले में पुलिस अब पादरी के साथ ही संबंधित चर्चों के खिलाफ अंधश्रद्धा कानून के तहत मामला दर्ज कर सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here