महिला की आत्मा लेने अस्पताल पहुंचा परिवार, कमरे के बाहर ऐसे हुए टोटके

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Source: bhaskar.com

राजस्थान के कोटा शहर के एमबीएस अस्पताल में देवउठनी एकादशी पर मंगलवार को टोने-टोटके चलते रहे।

कोटा. राजस्थान के कोटा शहर के एमबीएस अस्पताल में देवउठनी एकादशी पर मंगलवार को टोने-टोटके चलते रहे। अस्पताल में दो अलग-अलग स्थानों पर लोग अपने मृत परिजनों की आत्मा लेने अस्पताल पहुंचे। करीब 1 घंटे तक परिजन मेन गेट पर टोने-टोटके करते रहे, लेकिन किसी ने उन्हें नहीं टोका। बाद में जब मीडियाकर्मियों को देखा तो पुलिसकर्मी आए और उन्हें हटाया। जानें पूरा मामला..

– राजस्थान के सावर से आए कुछ लोग आत्मा लेने इमरजेंसी वार्ड के ईसीजी रूम की तरफ आए। यहां कमरे के बाहर ही लोग टोने-टोटके करते दिखे।
– आत्मा साथ लेने के लिए लोगों ने यहां दीपक जलाकर उसकी ज्योत अपने साथ ले गए।
– परिजनों ने बताया कि उनके परिवार की मीरा की 3 साल पहले यहां मौत हो गई थी। गांव के देवता के कहने पर हम आत्मा लेने यहां आए हैं।
– करीब एक घंटे तक चले इस ड्रामे के दौरान कोई भी इन्हे रोकना नहीं पहुंचा। मीडिया को देखकर उन्हें हटाया गया।
– उधर, अस्पताल अधीक्षक डॉ. पीके तिवारी ने कहा कि सभी वार्ड इंचार्ज अस्पताल चौकी के जवानों को पहले ही निर्देशित किया हुआ है कि अस्पताल में इस तरह की घटनाएं नहीं हों। यदि वे नहीं रोकते तो गलती है? मैं वार्ड प्रभारियों से जवाब तलब करूंगा।

केस 2
– इसी अस्पताल में सुबह हिंडौली से कुछ लोग भी आउटडोर के मेन गेट पर टोने-टोटके करते दिखे। इनके साथ हिंडौली के पूर्व प्रधान दो बार भाजपा के विधायक प्रत्याशी रह चुके पोखरलाल सैनी भी आए हुए थे।
– परिजनों ने बताया कि बिजली विभाग में कार्यरत छैलाराम की 14 मई को अस्पताल के मेन गेट पर ही मौत हो गई थी, उन्हीं की आत्मा लेने अस्पताल आए हैं। करीब 1 घंटे तक परिजन मेन गेट पर टोने-टोटके करते रहे, लेकिन किसी ने उन्हें नहीं टोका। बाद में जब मीडियाकर्मियों को देखा तो पुलिसकर्मी आए और उन्हें हटाया। साथ आए भाजपा नेता सैनी ने कहा कि छैलाराम का परिवार मेरे पड़ोस में रहता है। उनकी जब मौत हुई, तब भी मैं उनके साथ था।
दावा : अस्पताल में भटक रही है आत्मा
हुआ यह कि उनकी मौत के बाद उनके बेटे शिवदास को हिचकी चलने लगी और तमाम तरह का इलाज कराने के बाद भी हिचकी बंद नहीं हुई। हिंडौली में देवता ने बताया कि पिता की आत्मा अस्पताल में ही भटक रही है, आत्मा को लेकर आओगे तो सारी समस्या दूर हो जाएगी। परिवार ने सहमति दी, उसी दिन से हिचकी आना बंद हो गई। इसके बाद देवता ने ही देवउठनी एकादशी का दिन बताया और इसीलिए आत्मा लेने आए हैं। सैनी से जब पूछा गया कि यह अंधविश्वास क्यों? तो वे बोले कि मैं इसे अंधविश्वास नहीं मानता। परिवार की स्थिति के हिसाब से काम किया, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

 

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