जानिए चोटीकांड का सचः बाल की खाल

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Source: aajtak.intoday.in

आईपीसी यानी भारतीय दंड संहिता की धारा 509 यानी महिला सम्मान को ठेस पहुंचाना, मारपीट करना, बाल या चोटी काटने की सज़ा एक साल है. अब ज़रा सोचिए…भारत-चीन के बीच जारी तनातनी से भी ज्यादा जो पिछले तीन-चार दिनों से तनाव दे रहा है, अगर वो सचमुच है और पकड़ा भी जाता है, तो उसकी क्या सज़ा होगी? मगर इसे कहते हैं बाल की खाल निकालना. सोशल मीडिया और मीडिया चोटी के पीछे ऐसे पड़ गई है कि बाकी सारे तनाव और मुद्दे छोटे और बौने पड़ गए हैं. क्या कीजिएगा जब विश्वास अंधा और शरारत वहशत बन जाए, तो चोटी हेडलाइंस बन जाती है.

कहते हैं झूठ के पांव नहीं होते लेकिन झूठ की चाल बेहद तेज होती है. अब आप देख लीजिए राजस्थान से शुरु हुए चोटी काटने के खौफ ने अब तक आधे हिंदुस्तान को अपनी गिरफ्त में ले लिया है. हर एक नई वारदात के साथ ही नई कहानी भी सामने आती है. किसी को कोई आदमी नजर आता है, किसी को बिल्ली तो किसी को कोई साया लेकिन सच्चाई क्या है, इसका सुराग लगाने में अब तक नाकामयाबी ही हासिल हुई है.

पुलिस भले ही अपनी ओर से तफ्तीश कर रही हो लेकिन चोटी काटने की ये वारदात कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही हैं. दिल्ली से ही चोटी काटने की तीन नई वारदात सामने आई हैं. पहली वारदात बाहरी दिल्ली के रोहिणी से है तो दूसरी वारदात दक्षिण पश्चिमी के सरित विहार इलाके से. रोहिणी के सेक्टर 11 की एक कोठी मे काम करने वाली महिला की चोट किसी ने काट डाली. वक्त दिन का था और वो उस वक्त काम कर रही थी. काम करने के दौरान जब वो कोठी की बालकनी की सफाई कर रही थी तभी एक सफेद साए ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया. इससे पहले वो संभल पाती अपना होश खो बैठी और फिर जब होश आया तो बाल कटे हुए थे.

सरिता विहार में भी कहानी कुछ ऐसी ही है. बस फर्क इतना है कि पिछली वारदात में मेड घर में काम कर रही थी तो इस घटना में महिला घर के अंदर सोई हुई थी. जब नींद खुली तो देखा कि बाल फर्श पर बिखरे हुए थे. समझ नहीं आया कब और कैसे बाल काट दिए गए. चोटी काटने का एक वाक्या दिल्ली की सुंदर नगरी इलाके में भी पेश आया. यहां 10वीं क्लास में पढ़ने वाली लड़की स्कूल से घर आने के बाद अपने कमरे में सो रही थी. घर में उस वक्त उसकी बड़ी बहन भी मौजूद थी, जो बाहर वाले कमरे में सो रही थी. छात्रा के मुताबिक जब उसकी नींद खुली तो उसके साथ भी वही हुआ जिसने देश भर की लड़कियों की नींद उड़ा रखी है.

चोटी काटने की वारदात गाजियाबाद के मसूरी इलाके के मिसलगढ़ी में भी हुई है. यहां निशाने पर एक नहीं बल्कि दो लड़कियां थीं. दावा है कि जब दोनों बुधवार रात अपने घर में सो रही थीं तो किसी शय ने उनके बाल काट डाले. न किसी को आते हुए देखा गया न जाते हुए और न ही नींद में बाल कटने का एहसास हुआ.

उत्तर भारत में हो रहीं इन वारदातों के पीछे कौन है. इसका पता तो अब तक नहीं चला है लेकिन हर मामले में शक के दायरे में घरवाले और खुद वो महिला या लड़की होती है, जिसके साथ ये घटना घटी है. हालांकि इस तरह की बढ़ती वारदातों की वजह से लोगों के दिल में डर बैठा हुआ है. और वो हर वारदात के साथ बढ़ता जा रहा है.

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