काशी में कार्तिक मास स्नान 100 बार माघ में डुबकी लगाने के बराबर, जानिए इस मास का धार्मिक महत्व

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Source: amarujala.com

Kartik month and ganga snan is very special in kashi

स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण में कार्तिक स्नान का फल एक सहस्त्र बार किए गंगा स्नान के समान, सौ बार माघ स्नान के बराबर बताया गया है। जो पुण्य फल कुंभ में प्रयाग में स्नान करने पर मिलता है, वही फल कार्तिक माह में काशी में गंगा स्नान का है।
मान्यता है कि पंचगंगा घाट पर देवलोक से देवी-देवता प्रतिदिन धरती पर उतरते हैं। वाराणसी के पंचगंगा घाट से लेकर अस्सी तक मास पर्यंत स्नान, दीपदान और माधव की प्रतिमाओं को बनाकर मोल-तोल करने का उत्सव आरंभ हो गया है।

त्रिपुरासुर के वध के उपलक्ष्य में खुशी में कभी देवतदाओं ने दीपोत्सव मनाया था। उसी स्मृति में देव दीपावली महोत्सव पर गंगा तटों पर लाखों दीए जलाने के साथ इस उत्सव की पूर्णाहुति होगी।

काशी के सर्वश्रेष्ठ पंचनद तीर्थ पर ही भगवान विष्णु का वास है, ऐसी मान्यता है। इस महात्म्य को साकार करने के लिए काशी के लोग गंगा तटों पर महीने भर स्नान, दीपदान का उत्सव मनाते हैं। गंगातटों पर आकाशदीपों की शृंखला देवताओं की राह में उजाला करने का उत्सव है।

कोजागरी पर श्रीमठ संगीत महोत्सव से इसकी शुरुआत हो गई है। इसके बाद 16 अक्तूबर को गोवत्स द्वादशी पर गाय-बछड़ों की पूजा-आरती उतारी जाएगी। 17 अक्तूबर को धन कुबेर संग लक्ष्मी पधारेंगी। धन तेरस पर धन वर्षा का महासंयोग आएगा।

18 अक्तूबर को जबां रामभक्ति शिरोमणि हनुमान जी की जयंती का उत्सव मनेगा, वहीं 19 अक्तूबर को ज्योति पर्व दीपावली पर लक्ष्मी पूजा जाएंगी। 20 अक्तूबर को अन्नकूट महोत्सव मनेगा।

28 अक्तूबर को गोपाष्टमी मनेगी तो 29 को अक्षय नवमी पर आंवले के वृक्ष के नीचे भोग लगेगा। श्रीमठ परिवार की ओर से गंगा पार आंवले के बगीचे में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचेंगे। 31 अक्तूबर को बारात निकलेगी। बाजे गाजे के साथ पंचगंगा घाट पर तुलसी विवाह होगा।

इस माह के बारे में क्या कहते हैं विद्वान

 

काशी विश्वनाथ मंदिर

घाट-घाट पर महिलाएं तुलसी विवाह का उत्सव मनाएंगी। दो नवंबर को बाबा विश्वनाथ, अन्नपूर्णा, ढुंढिराज गणेश, साक्षी विनायक का अभिषेक होगा तो तीन नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी पर तुलसी सहस्त्रार्चन। चार नवंबर को काशी महादीपोत्सव के रंग में देव दीपावली पर्व पर रंगेगी।

श्रीमठ पीठाधीश्वर रामानंदाचार्य रामनरेशाचार्य महाराज का कहना है कि पंचनद तीर्थ पर संपूर्ण तीर्थों के साथ तीर्थराज प्रयाग, अखिल देवों के साथ महादेव भी कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पंचगंगा में उतर कर धन्यता का अनुभव करते हैं।
ऐसा स्कंद पुराण में उल्लेख है। यहां देवी-देवता कार्तिक मास में उत्सव मनाते हैं। यह एक अद्भुत संयोग है।

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी  ने बताया कि कार्तिक के महीने में स्नान और दान की बड़ी महिमा बताई गई है। इस माह में स्नान करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

आश्विन शुक्ल पक्ष से कार्तिक शुक्ल पक्ष तक गंगा में स्नान-ध्यान करना श्रेष्ठ माना गया है। स्कंदपुराण के अनुसार कार्तिक मास में किया गया स्नान व व्रत भगवान विष्णु की पूजा के समान कहा गया है। इस दिन गंगा स्नान, दीप दान करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है।

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