यहां गुरू के अंतिम दर्शन को पहुंचे लाखों श्रद्धालु, ढाई हजार लोगों ने सर मुंडवाए

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Source: bhaskar.com

सद्गुरु के पार्थिव शरीर को पालकी में बैठाया फिर बस में रखकर समाधि स्थल पर ले जाया गया।यहां गुरू के अंतिम दर्शन को पहुंचे लाखों श्रद्धालु, ढाई हजार लोगों ने सर मुंडवाए

गुरु श्रीस्वामी दर्शन पूर्णानंद महाराज के शरीर को बुधवार को समाधि ।

भोपाल.अशोकनगर के ईसागढ़ मेॆ श्री परमहंस अद्वैत मत की पादशाही परम्परा के पांचवें गुरु श्रीस्वामी दर्शन पूर्णानंद महाराज के शरीर को बुधवार को समाधि दिलाई गई। सद्गुरु के अंतिम दर्शन करने देशभर से करीब 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आनंदपुर आश्रम पहुंचे। भीड़ को बढ़ता देख समाधि स्थल पर पहुंचने का रूट बदलना पड़ा। समाधि स्थल पर लाने से पहले रोजाना होने वाली आरती की गई। आरती के बाद दोपहर 2 बजे साधुओं ने सद्गुरु के पार्थिव शरीर को पालकी में बैठाया फिर बस में रखकर समाधि स्थल पर ले जाया गया। बस के आगे लेट रहे थे श्रद्धालु…

– श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक थी और श्रद्धालु भावुक होकर गुरु महाराज को ले जा रही बस के आगे लेट रहे थे।
– ऐसे में दूसरे रास्ते से समाधि बस से पहुंचे। समाधि स्थल पर सेफ्टी के खासे इंतजाम किए गए। श्रद्धालु को समाधि स्थल पर जाने नहीं दिया गया।
समाधि स्थल पर किया गुरु नाम मंत्र का जाप, आज होगा सत्संग
– लाइव अंतिम दर्शन के लिए लगाए एलईडी प्रोजेक्टर
– समाधि स्थल के चारों ओर बेरीकेड्स लगाए और पुलिस बल के अलावा निजी सुरक्षा कर्मी तैनात रहे।
– गुरु महाराज के दर्शन के लिए मंदिर एवं समाधि स्थल पर प्रोजेक्टर लगाए थे।
– मंदिर एवं समाधि स्थल के बाहर खड़े श्रद्धालुओं ने बड़े एलईडी प्रोजेक्टर पर लाइव दर्शन किए।
बाहर से आई संगत का आज होगा सत्संग एवं भंडारा
– गुरुवार को मंदिर पर सत्संग होगा। इसके साथ ही बाहर से आई संगत का भंडारा होगा।
समाधि स्थल पर बनाया जाएगा मंदिर, पाठ शुरू
– साथ ही समाधि स्थल पर बुधवार से पाठ शुरू हो गया है। समाधि स्थल पर मंदिर बनाया जाएगा जिसका काम शुरु हो गया है।
ढाई हजार लोगों ने कराए मुंडन
– देशभर से आए करीब दो से ढाई हजार श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के अनुसार मुंडन कराया। पिछले 10 साल से अहमदाबाद से हरीश भाई, 22 साल से चंड़ीगढ़ के सुभाष अरोरा आनंदपुर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरह तिरुपति बालाजी मंदिर पर बाल दान करने की परम्परा है वैसे ही यह हमारा तीर्थ है और इसलिए हम यहां बाल दान करने मुंडन करा रहे हैं। गुरु महाराज से हमारी धार्मिक आस्था जुड़ी है।
श्रद्धालुओं ने किया गुरु मंत्र का जाप
– समाधि स्थल पर पहुंचने के बाद गुरु महाराज द्वारा दिए नाम मंत्र का जाप किया गया। जहां जितने भी श्रद्धालु मौजूद थे उन्होंने मंत्र का जाप किया। इसके बाद बस में रखी पालकी को निकाला और पालकी में विराजमान गुरु महाराज को ध्यान मुद्रा में समाधि में दिलाई।
– महात्मा शब्दानंद ने बताया कि मलेशिया से डॉ. पंजाबी, सिंगापुर से डा. कमल बॉस आए हैं। कहां-कहां से संगत आई है इसके बारे में बता पाना मुश्किल है। श्रद्धालुओं की संख्या इतनी ज्यादा थी अगर आने के लिए पास देते तो शिवपुरी तक जाम लग सकता था।

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