अक्षरधाम मंदिर परंपरा और मॉडर्न टेक्नोलॉजी की बेहतरीन मिसाल: मोदी

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Source: bhaskar.com

गांधीनगर (गुजरात). नरेंद्र मोदी गुरुवार को स्वामीनारायण संप्रदाय के अक्षरधाम मंदिर के रजत जयंती समारोह (सिल्वर जुबली प्रोग्राम) में शामिल हुए। पीएम ने यहां भगवान स्वामीनारायण के दर्शन किए और सनातनम प्रदर्शनी देखी। मोदी ने इस मौके पर कहा, “प्रमुख स्वामी का विश्वास कभी चमत्कार में नहीं रहा। वे लोगों के उत्थान में विश्वास करते थे। सामाजिक चेतना लाने में उनकी अहम भूमिका थी। उन्होंने अक्षरधाम को सामाजिक चेतना का केंद्र बनाया। ये मंदिर मॉडर्न टेक्नोलॉजी और परंपरा का अद्भुत उदाहरण है।”

चमत्कार के बिना हमें मजा नहीं आता- मोदी
– मोदी ने कहा, “मेरा सौभाग्य है कि मैं यहां आया। पूज्य स्वामी से मेरी निकटता रही है। आजकल एक परंपरा सी हो गई है कि चमत्कार के बिना हमें मजा नहीं आता। लेकिन, पूज्य स्वामी में चमत्कार जैसी कोई चीज नहीं थी। लेकिन, पता नहीं क्यों आप उनसे एक बार मिलने के बाद, फिर उनसे दूर नहीं रह सकते थे। प्रमुख स्वामी फैलाव नहीं, जीवन में ऊंचाई के पक्षधर थे। वो हरि भक्तों को हरि की तरह ही ऊंचाई पर देखना चाहते थे।”

– ”प्रमुख स्वामी ने मात्र एक इमारत रूपी मंदिर नहीं बनाया। लोग कहते हैं कि किसी ने एक, किसी ने पांच और किसी ने 12 सौ मंदिर बनाए। पर प्रमुख स्वामी ने सामाजिक चेतना को केंद्र बनाया। मैं उनके करीबियों में रहा हूं वो कहते थे सामाजिक चेतना को परंपरा बनाना होगा। समयानुकूल परिवर्तन भारत में मंदिर बनाने और उसके मैनेजमेंट से जुड़ा है। अक्षरधाम में आपको गंदगी नहीं मिलेगी। कहीं झूठन नहीं मिलेगी। अगर आपने ऐसा किया तो ये ठीक नहीं। वो छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखते थे।”

प्रमुख स्वामी ने कभी चमत्कार में यकीन नहीं किया

– ” स्वामी जी समयबद्ध काम पर वो जोर देते थे। अक्षरधाम मॉडर्न टेक्नोलॉजी और परंपरा का अद्भुत उदाहरण है। यहां का मैनेजमेंट भी स्वामी जी की ही देन है। आज आधुनिकता और दिव्यता का सुखद संयोग ये मंदिर है। यहां प्रत्येक पत्थर बोलता है। हाथी पर भी हाथ फेरेंगे तो लगेगा कि जैसे वो बोल उठेगा। भक्ति को तराजू में नहीं तोला जा सकता।”
– ”’प्रमुख स्वामी ने कभी चमत्कार में यकीन नहीं किया। उन्होंने दुनियाभर में 1200 मंदिर बनाए। लेकिन हर जगह दिव्यता और अध्यात्म को ही महत्व दिया। कलाम साहब भी उनको बहुत मानते थे। जीवन ऐसा जियो जो समाज के आड़े नहीं आए बल्कि प्रमुख स्वामी के जीवन की ही तरह दूसरों के लिए मिसाल बन जाए। आज भी याद है कि मैं मुरली मनोहर जोशी के साथ श्रीनगर के लाल चौक में झंडा फहराने पहुंचा। आतंकी धमकी दे रहे थे। उसी समय प्रमुख स्वामी का फोन आया। पूछा- बेटा तू सुरक्षित पहुंचा या नहीं।”

नर्मदा योजना में स्वामी जी का बड़ा योगदान रहा

– ”जब गुजरात में भूकंप आया तो स्वामी ने मानव प्रेम की अद्भुत मिसाल पेश की। उन्होंने पूछा- सिर्फ ये बताओ कि कितने फूड पैकेट भेजना है। उन्होंने स्वयं सेवकों का दल भेजा। आपको न्यूयॉर्क में जरूरत हो या दिल्ली में, स्वामी जी के स्वयं सेवक हमेशा हाजिर होते हैं। देश में जब राजनीतिक तौर पर जुल्म हो रहे थे। अंग्रेज भी समझ नहीं पाए कि भारतीयों को इतनी शक्ति कहां से मिलती है। ये अध्यात्म की शक्ति थी। स्वामी नारायण भगवान ने यही दिया। गुजरात में नर्मदा योजना को लाने में प्रमुख स्वामी का बड़ा योगदान था। वो मुझसे हर अपडेट लेते थे। ये उनके चरित्र की विशालता थी। आज यह योजना गुजरात की जीवन रेखा है। योजना पूरी होने पर स्वामी बहुत खुश थे। स्वामी जी हमें रास्ता दिखा गए हैं, उनके सपनों को साकार करें।”
मोदी ने अक्षरधाम मंदिर में सनातनम प्रदर्शनी देखी
– इसके पहले, मोदी गुरुवार शाम पांच बजे एयरफोर्स के स्पेशल प्लेन से अहमदाबाद पहुंचे। मोेदी ने इस मंदिर की 25 साल की यात्रा पर तैयार 15 मिनट के भव्य ध्वनि एवं प्रकाश (लाइट एंड साउंड ) शो ‘अक्षरधाम सनातनम’ देखा।
प्रमुख स्वामी के निधन पर 15 अगस्त को आए थे मोदी
– मोदी ढाई महीने बाद अक्षरधाम आए। इससे पहले मोदी 15 अगस्त को जब गुजरात आए थे, तो स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रमुख स्वामी के निधन पर शोक व्यक्त करने अक्षरधाम गए थे। पीएम ने स्वामी को अपने पिता जैसा बताया था। मोदी ने बताया था कि प्रमुख स्वामी उनसे बहुत प्रेम करते थे।
– स्वामीनारायण संप्रदाय के करोड़ों फॉलोवर्स हैं। और इनमें भी बहुत बड़ी तादाद पाटीदारों की है। आरक्षण के मुद्दे पर यही समुदाय बीजेपी से नाराज चल रहा है। हार्दिक पटेल बहुत हद तक कांग्रेस को समर्थन देने की बात कह चुके हैं। लिहाजा, मोदी की गुरुवार की अक्षरधाम यात्रा के सियासी मायने भी देखे जा रहे हैं।

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