नवरात्रि के 9 रंग: जानिए नवरात्रि में 9 रंगों का महत्व और उनकी उपयोगिता

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Source: religion.bhaskar.com

आइए जानते हैं नवरात्रि के उन नौ रंगो के बारे में जो नवरात्रि को एक उत्सव में बदल देते हैं।नवरात्रि के 9 रंग:  जानिए नवरात्रि में 9 रंगों का महत्व और उनकी उपयोगिता

नवरात्रि चल रहे हैं और देश भर में मां दुर्गा की उपासना की धूम है। एक तरफ भक्ति पूजा और दूसरी तरफ गरबा की धूम। मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना के साथ साथ उन नौ रंगों को भी त्योहार में शामिल कीजिए जिनके चलते गरबा और फलाहार चमकते दमकते रहें।
आइए जानते हैं नवरात्रि के उन नौ रंगो के बारे में जो नवरात्रि को एक उत्सव में बदल देते हैं।

प्रतिपदा का शुभ रंग पीला

पहले दिन का भोग लगाइए पीले रंग की वस्तुओं से। चाहे तो आलू की खिचड़ी बनाइए या सामक के चावल। गरबा की बात करें तो रौशनी की रात में पीले रंग का लहंगा पहनकर खो जाइए दुर्गा के गीतों में।

द्वितीया का रंग हरा

दूसरे दिन यानी द्वितीया का प्रतिनिधि रंग है हरा। यूं भी हरा रंग कूल और सकून देने वाला है। आप चाहें तो कच्चे केले की टिक्की बनाकर फलाहार में हरा रंग भर दीजिए। रात को गरबा में हरे रंग का शीशों की बढ़वारी वाला लहंगा चनिया पहन कर चारों तरफ हरियाली बिखेर दीजिए

तृतीया का रंग स्लेटी

तीसरे दिन नवरात्रि का प्रतिनिध रंग है स्लेटी रंग। फलाहार में बिना किसी आर्टिफिशयल रंग का प्रयोग किए बिना भी आप स्लेटी रंग को अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं। साबूदाने के पापड़ खाइए या फिर मखाने की खीर। गरबे की रात में चटख स्लेटी रंग की चनिया चोली के साथ गहरे लाल रंग का दुपट्टा लीजिए और बिखेर दीजिए उत्सव के रंग।

चतुर्थी का रंग संतरी

नवरात्रि में चौथे दिन यानी चतुर्थी को संतरी रंग की प्रधानती रहती है। आप चाहें तो फलाहार में संतरे का रस पीजिए या फिर कद्दू की खीर खा सकते हैं। गरबे की रात में संतरी रंग का चनिया चोली आपकी खूबसूरती को दुगना कर देंगी और डांडिया नाइट्स में जमकर होगा उत्साह।

पंचमी का रंग सफेद

सफेद यूं भी शांति और सौम्यता का प्रतीक है। फलाहार में आप सफेद रंग का कुछ भी खा सकते हैं जैसे साबूदाने की खीर या केवल दूध भी पी सकते हैं। गरबा नाइट में आज की रात सफेद कपड़ों में चमकिए। दूधिया रोशनी आपके चारों तरफ जगमगाएगी और आप ही आप नजर आएंगे।

षष्ठी का रंग लाल

लाल रंग मां दुर्गा को पसंद है। लाल रंग शक्ति और शौर्य का प्रतीक है और इसी शक्ति की वजह से मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। आप चाहें तो फलाहार में टमाटर का रस पी सकते हैं या सिंधी तरीके से टमाटर की कढ़ी बनाकर खा सकते हैं। जहां तक गरबे की बात है तो लाल रंग किसे पसंद नही। लाल चटखदार चनिया चोली और लाल कुरते पर नीला पाजयामा पहन कर डांडिया खेलने जाएंगे तो हर तरफ वाह वाह की आवाज आएगी।

सप्तमी का रंग नीला

नीला यानी शांत, सौम्य और विस्तार वाला। हालांकि नीला रंग आपको व्रत के किसी फलाहार से प्राप्त नहीं होगा लेकिन आप चाहें को नीले रंग के कपड़े पहन कर मां की पूजा कर सकते हैं। इस दिन कुछ भी खाइए लेकिन मन में मां दुर्गा का स्मरण जरूर कीजिए। गरबा में नीले रंग के कांच की नक्काशी और सीपियों वाले चनिया चोली में आप आसमान से उतरी अप्सरा लगेंगी।

अष्टमी का रंग गुलाबी

मां दुर्गा की पूजा में हलके गुलाबी सेके हुए मालपुए चढ़ाएं और व्रत में फिरनी खा सकते हैं। आप चाहें तो गुलाबी रंग के गुला मां को अर्पण कर सकते हैं। गरबा में गुलाबी रंग के परिधानों को महत्व दीजिए और जमकर मनाइए डांडिया की रात।

नवमी का रंग बैंगनी

नवमी को मां दुर्गा को आप बैंगनी रंग के फूलों से सजाइए। इस दिन भोग अर्चना और कन्या पूजन के बाद आप चाहें तो बैंगन की कोई सब्जी बना सकते हैं। नवमी की रात बैंगनी रंग में चनिया चोली के साथ अंतिम दिन की अधिरात्री देवी का पूजन कीजिए और गरबा की धुनों पर जमकर थिरकिए।

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