वैष्णो देवी: पीक सीजन में होगी परेशानी, बर्फबारी के दौरान सूना रहता है मंदिर

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Source: bhaskar.com

अगर ज्यादा संख्या में श्रद्धालु आते हैं तो इन्हें अर्धकुमारी या कटरा में रोका जाएगा।
वैष्णो देवी: पीक सीजन में होगी परेशानी, बर्फबारी के दौरान सूना रहता है मंदिर
मां वैष्णो देवी की पिंड्डियां।
चंडीगढ़. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने माता वैष्णो देवी धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को लेकर सोमवार को ऑर्डर जारी किया। इसके मुताबिक, अब रोजाना 50 हजार लोगों को ही दर्शन की इजाजत दी जा सकती है। इस आदेश के बाद पीक सीजन में आने वाले भक्तों को इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी होगी। बर्फबारी के दौरान माता के भुवन सूना-सूना सा रहता है।
– वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुताबिक, 1986 में यहां आने वाले लोगों की संख्या करीब 14 लाख थी, जो 2012 में एक करोड़ से ज्यादा (104 लाख) हो गई। 2013 में कुल 93 लाख श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन किए। 2014 में करीब 78 लाख, 2015 में 78 लाख से ज्यादा और 2016 में करीब 77 लाख से ज्यादा लोगों दर्शन के लिए वैष्णो देवी आए थे।
– एनजीटी के नए आदेश के बाद अगर हर दिन 50 हजार लोग दर्शन करने आते हैं तो 365 दिन में ये आंकड़ा एक करोड़ बयासी लाख को पार कर जाएगा। लेकिन ये मुश्किल है। दिसंबर से लेकर मार्च तक यहां आने वालों की संख्या कई बार दस हजार के पार भी नहीं पहुंच पाती है। बर्फबारी के दौरान ये आंकड़ा और कम हो जाता है।
– अगर पीक सीजन की बात करें तों परीक्षाओं के बाद मार्च से जुलाई और नवरात्र के दौरान लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। एनजीटी के आदेश को लागू करने में इन्हीं दिनों सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।
– करीब तीन दशक पहले परंपरागत रास्ते की जगह नया रास्ता बनाया गया था। इसके बाद करीब दो साल पहले एक और नया रास्ता बनाया गया।

जम्मू से भी दूरी हुई कम

जम्मू से कटरा का रास्ता पहले दो घंटे का होता था। तीन टनल की बदौलत अब यह बमुश्किल 40 मिनट का रह गया है। 7 किमी लंबा ये रास्ता बालिनी ब्रिज से अर्द्धकुंवारी को जोड़ता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं में 80% पैदल यात्रा करते हैं। बाकी 6% हेलिकॉप्टर से और 14% घोड़े-पालकी से। नया रास्ता सिर्फ पैदल यात्रियों के लिए है।
– पुराने रास्ते की तुलना में नया रास्ता सिर्फ 500 मीटर छोटा है, लेकिन सुविधाएं कई हैं। रूट इतना चौड़ा है कि इमरजेंसी में एम्बुलेंस भी आसानी से आ-जा सके।
– इस रास्ते की सबसे खास बात ये है कि इस रूट के शुरू होने के बाद यात्री बाणगंगा से अर्द्धकुंवारी और हाथी मत्था की खड़ी और कठिन चढ़ाई लोगों को नहीं चढ़नी पड़ती।

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