गुरू नगरी अमृतसर पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, दरबार साहिब में हुए नतमस्तक

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Source: bhaskar.com

रामनाथ कोविंद देश के छठवें राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने इस पावन स्थल के प्रति अपनी अगाध आस्था जताई है।
 गुरू नगरी अमृतसर पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, दरबार साहिब में हुए नतमस्तक
दरबार साहिब में राष्ट्रपति रामनाथ भवय स्वागत किया गया।
अमृतसर।राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद वीरवार को पंजाब के आदमपुर पहुंचे। उन्होंने आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन के 117 एचयू और 223 स्कॉर्डन के प्रेसिडेंट स्टेंडर्ड एंड कलर प्रेजेंटेशन प्रोग्राम में हिस्सा। इसके बाद वह अमृतसर पहुंचे और दरबार साहिब में माथा टेका।वह जलियांवाला बाग और दुर्ग्याणा मंदिर भी गए। इससे पूर्व राष्ट्रपति ने एसजीपीसी के स्थापाना दिवस के मौके पर कमेटी ऑफिस का उद्‌घाटन भी किया।

कोविंद दरबार साहिब आने वाले देश के छठे राष्ट्रपति…

देश के 14 वें राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद देश के छठवें राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने इस पावन स्थल के प्रति अपनी अगाध आस्था जताई है।

1. देश केराष्ट्रपतियों की बात करें तो चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरि ने 1969 मेंकार्यभार संभालने के बाद यहां आकर माथा टेका था।

2. इस कड़ी को आगेबढ़ातेहुए छठे राष्ट्रपति डॉ. नीलम संजीवा रेड्डी, जिनका कार्यकाल 1977-1982 रहा, यहां आकर माथा टेका था।

3. सातवेंराष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, जो कि देश के सातवें राष्ट्रपति थे, ने यहां आकर माथा टेका। वह मुख्यमंत्री सेलेकर अन्य पदों पर रहतेहुए यहां कई बार आ चुके हैं।

4. देश के11वें राष्ट्रपति डॉ. एपीजेअबुल कलाम यहां पर 23 मार्च 2003 को आए।

इस दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह थे और प्रकाश सिंह बादल विपक्ष में थे।

डॉ. कलाम नेगुरु घर मेंमाथा टेकने के अलावा एक ऐसा ऐतिहासिक काम किया था, जो सियासी गलियारे में आज भी याद किया जाता है।

दरबार साहिब के बाहर उनके स्वागत के लिए पंडाल लगाया गया था।

महामहिम के एक तरफ बादल और दूसरे तरफ कैप्टन बैठे हुए थे।

समागम समाप्त होने के बाद कलाम साहब ने उठते हुए दोनों का हाथ मिलवा कर एकता का संदेश दिया था।

5. देश की पहली महिला और 12वीं राष्ट्रपति डॉ. प्रतिभा पाटिल साल 2008 में यहां आईं और गुरु घर के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

उन्होंने इस यात्रा के दौरान गुरदासपुर स्थित सम्राट अकबर के पसंदीदा बाग से लाए गए आम के पौधे को खालसा कॉलेज में रोपा था, जो आज भी मौजूद है।

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