अयोध्या में बने राम मंदिर, हम जमीनी हक छोड़ देंगे: शिया वक्फ बोर्ड का नया फॉर्मूला

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Source: bhaskar.com

वक्फ बोर्ड के ड्राफ्ट में लिखा गया है कि बाबरी मस्जिद को 1528 से 1529 के बीच मीर बाकी ने अयोध्या में बनवाया था।

इस मामले पर 5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
लखनऊ. शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या विवाद पर नया प्रपोजल दिया है। अगले महीने सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले वक्फ बोर्ड की तरफ से ये प्रस्ताव आया है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा कि हमने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसे 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया है। ड्राफ्ट में अयोध्या में राम मंदिर और लखनऊ में मस्जिद बनाने की बात कही है। इस प्रपोजल पर कई महंतों ने सहमति जताई है। 5 दिसंबर को इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

शिया वक्फ बोर्ड का फॉर्मूला, 5 प्वाइंट

1) विवादित जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का हक नहीं
– शिया वक्फ बोर्ड का दावा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड का पूरा केस 26 फरवरी 1944 को जारी एक नोटिफिकेशन पर बेस्ड है। इसमें उसने बाबरी मस्जिद पर हक जताया था। लेकिन कोर्ट ने इस नोटिफिकेशन की वैलिडिटी पर शक जताया था। बाबरी मस्जिद पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का रजिस्ट्रेशन भी फैजाबाद कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर अवैध घोषित हो चुका था। लिहाजा, सुन्नी वक्फ बोर्ड को इस मामले में फैसला लेने का हक नहीं है।

2) हम अयोध्या में जमीन का पूरा हक छोड़ने को तैयार
– शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि हिंदुओं की आस्था का सम्मान करते हुए और राष्ट्र हित में विवाद खत्म करने के मकसद से हम राम मंदिर बनाने के लिए पूरी जमीन पर अपना हक छोड़ते हैं।

3) लखनऊ में मस्जिद के लिए मिले जगह
लखनऊ के मोहल्ला हुसैनाबाद में नजूल की खाली पड़ी एक एकड़ जमीन शिया समुदाय को मस्जिद बनाने के लिए मिले। यह जमीन उत्तर प्रदेश सरकार दे।

4) लखनऊ में मस्जिद किसी मुगल बादशाह के नाम पर नहीं होगी
– मीर बाकी या किसी मुगल बादशाह के नाम पर मस्जिद नहीं होगी। इसे अमन की मस्जिद नाम दिया जाएगा।

– इस प्रपोजल पर यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी, हनुमान गढ़ी निर्मोही अखाड़े के महंत रामदास, नृत्य गोपालदास, रामविलास वेदान्ती, श्रीपंच निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास जैसे नेताओं के दस्तखत हैं।

5) बाबर का सेनापति शिया मुसलमान था

– ड्राफ्ट में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद को 1528 से 1529 के बीच मीर बाकी ने अयोध्या में बनवाया था। मीर बाकी बाबर के सेनापति थे और वो शिया मुसलमान थे।
– बाबरी मस्जिद बनने के बाद उसके मुतल्लवी (केयरटेकर) मीर बाकी ही रहे। मीर बाकी के बाद 1945 तक उनके परिवार के लोगों ने इस मस्जिद के मुतल्लवी का जिम्मा संभाला। ये सभी लोग शिया मुसलमान थे।

शिया कमेटी ही वसीम रिजवी को नहीं मानती: इकबाल अंसारी

– हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने कहा कि वसीम रिजवी को तो शिया कमेटी भी नहीं मानती है। घोटालों से बचने के लिए यह राम मंदिर बनाना चाहते हैं। हमारे यहां सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड जो करेगा वही माना जाएगा। ड्राफ्ट भले ही दे दिया गया हो लेकिन कोर्ट का फैसला ही माना जाएगा।

– हाशिम, बाबरी विवाद में ही पक्षकार थे। उनकी मौत हो चुकी है।

अयोध्या विवाद में कौन-कौन से पक्ष हैं ?

– निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड।

तीनों पक्षों का दावा क्या है ?

– निर्मोही अखाड़ा: गर्भगृह में विराजमान रामलला की पूजा और व्यवस्था निर्मोही अखाड़ा शुरू से करता रहा है। लिहाजा, वह स्थान उसे सौंप दिया जाए।
– रामलला विराजमान: रामलला विराजमान का दावा है कि वह रामलला के करीबी मित्र हैं। चूंकि भगवान राम अभी बाल रूप में हैं, इसलिए उनकी सेवा करने के लिए वह स्थान रामलला विराजमान पक्ष को दिया जाए, जहां रामलला विराजमान हैं।
– सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड:सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का दावा है कि वहां बाबरी मस्जिद थी। मुस्लिम वहां नमाज पढ़ते रहे हैं। इसलिए वह स्थान मस्जिद होने के नाते उनको सौंप दिया जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

– 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।

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