ताजमहल मकबरा या मंदिरः 17 साल बाद फिर उठ खड़ा हुआ विवादों का जिन्न

8
  1. Source: amarujala.com

केंद्रीय सूचना आयोग के एक सवाल ने 17 साल पहले सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुके ताज के विवाद को फिर हवा दे दी। ताजमहल मंदिर है या मकबरा पर जवाब मांगने से विवादों का जिन्न फिर उठ खड़ा हुआ है। दो साल पहले आगरा में ही 6 अधिवक्ताओं ने स्थानीय अदालत में ताजमहल को अग्रेश्वर महादेव मंदिर होने का दावा करते हुए याचिका दायर की थी।

केंद्र सरकार का संस्कृति मंत्रालय हालांकि संसद में सफाई दे चुका है कि ताज में मंदिर होने के साक्ष्य नहीं है, लेकिन इतिहासकार पीएन ओक की किताब (ट्रू स्टोरी आफ ताज) के बाद ताज को मंदिर मानने वाले ताजमहल के तहखानों को खोलने की मांग करने लगे हैं। भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी समेत कई नेता ताजमहल के दौरे में भूमिगत कक्षों को खोलने की वकालत कर चुके हैं।

आगरा विवि के इतिहास एवं संस्कृति विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुगम आनंद कहते हैं कि ताजमहल जिस जगह है, वह राजा जय सिंह की जमीन थी। ताज के निर्माण से पहले यहां मंदिर था, कब्र, महल या उद्यान या कुछ और, इसका इतिहास में प्रमाण नहीं मिलता। ताज के निर्माण के संबंध में साक्ष्य जरूर हैं, जो मौजूद हैं।

इतिहासविद् डा. तरुण शर्मा कहते हैं कि हिंदू राजाओं के महल के बगीचों में मंदिर, खासतौर पर शिव मंदिर बनाने की परंपरा थी। इस स्थान पर शिव मंदिर था या नहीं यह तभी स्पष्ट हो सकता है, जब ताजमहल के नीचे बंद स्थानों की जांच और गहन शोध हो।

कबरे के समर्थन में तर्क

– ताज से पहले हुमायूं का मकबरा, एत्माद्दौला भी इसी तर्ज पर बना है

– मुमताज की मौत के बाद ताज 1632 से 1652 के बीच बनाया गया

– ताज परिसर में मस्जिद बनी है और इस्लामिक वास्तु शैली का निर्माण है

– पर्शियन और मुगलिया शैली का निर्माण, समरकंद की तरह चार बाग

मंदिर के समर्थन में तर्क

– ताज के गुंबद पर सूर्य का चिन्ह, दीवारों पर ऊं, कमल, फूलों को उकेरा गया

– प्रवेश द्वार पर सांप, बैल के सींग उभरे, संगमरमर की जाली पर 108 कलश

– किसी मकबरे को महल का नाम नहीं मिला, किसी पुस्तक में जिक्र नहीं

– मंदिर में ही गोशाला, नक्कारखाना होता है, जो ताजमहल में मौजूद है

– कुरान की आयतों के साथ ताज में कहीं निर्माणकर्ता, तारीख नहीं लिखी

– गुंबद पर त्रिशूल के साथ नारियल, महल में 500 से ज्यादा कमरे मौजूद

– गुंबद के नीचे 22 भूमिगत कमरे, जिनमें मूर्तियां रखे होने का दावा

– ताज के दरवाजे की कार्बन डेटिंग में यह ताज से 300 साल पहले का होना

राजा जयसिंह के फरमानों पर टिका दावा

जयपुर के राजा जयसिंह के कुछ फरमानों का जिक्र इतिहासकार पीएन ओक ने अपनी किताब में किया है। इसमें 18 दिसंबर, 1633 को भेजे गए फरमान में ताज भवन को वापस मांगने का जिक्र है। इसके अलावा मकराना से संगमरमर मंगवाने के लिए शाहजहां के फरमान का जिक्र किया गया है। ताज को मंदिर मानने वाले दावा करते हैं कि ताज के लिए जितनी कम गाड़ियां संगमरमर मांगा गया, उसमें केवल गुंबद पर आयतें उकेरने लायक ही संगमरमर आ सकता है। ताज पर कितना खर्च हुआ, यह ब्यौरा शाहजहांकाल की किसी पुस्तक में नहीं है।

किवदंतियों को भी बनाया आधार

ताजमहल के अंदर नक्कारखाना है, जबकि मकबरे में शोर की इजाजत ही नहीं होती। इसके अलावा पास ही शवदाह गृह है। ताज के मंदिर होने के दावे का समर्थन करने वालों के मुताबिक 1934 में दिल्ली के यात्री ने ताजमहल के तहखाने में शिव प्रतिमा देखी थी, वहीं 1962 में तहखाने के संरक्षण के दौरान तीन मूर्तियां एक दीवार से बाहर निकल पड़ी थीं, जिन्हें तुरंत ही चुनवा दिया गया और नीचे के कमरों में जाने वाले रास्ते को ईंटों से बंद करा दिया गया। उसके बाद ही उत्तरी यमुना किनारे की ओर के दरवाजों को हटाकर ईंटों से बंद करा दिया गया। ताज के मंदिर होने के समर्थन में सोशल मीडिया, इंटरनेट पर जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here