नरेन्द्र गिरि से मिले वसीम रिजवी, बोले- राम की धरती है अयोध्या, वहीं बनेगा मंदिर

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Source: bhaskar.com

वसीम रिजवी ने दावा किया कि बातचीत अपने आखिरी स्टेज में हैं। इसके बाद के समझौते का फॉर्मूला SC में दाखिल करेंगे।
 नरेन्द्र गिरि से मिले वसीम रिजवी, बोले- राम की धरती है अयोध्या, वहीं बनेगा मंदिर
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से वसीम रिजवी मिले।
इलाहाबाद. शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने इलाहाबाद में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा, “अयोध्या राम की धरती है, वहां राम का ही मंदिर बनेगा। अगर मुस्लिम समुदाय चाहता है कि मस्जिद बने, तब मुस्लिम आबादी को देखते हुए एक मस्जिद का निर्माण कराया जा सकता है। वैसे फैजाबाद और अयोध्या में रहने वाले मुसलमानों के लिए पर्याप्त मस्जिदें हैं।” सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई अधिकार नहीं: वसीम रिजवी
– मुलाकात के बाद वसीम रिजवी ने कहा, “बातचीत को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई अधिकार नहीं बनता है। मस्जिद शियाओं की है। इस मामले का हल शिया वक्फ बोर्ड ही निकालेगा। लोगों की भावनाओं और हित को देखते हुए अयोध्या में उसी जगह पर राम मंदिर का निर्माण होगा।” वसीम रिजवी ने दावा किया कि, “बातचीत अपने आखिरी स्टेज में हैं। बातचीत और चर्चा के बाद सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करेंगे।”
-शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा,”1944 में ही सुन्नी वक्फ बोर्ड का रजिस्ट्रेशन सिविल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुका है।वो पूरी तरीके से अवैध है। इस तरीके से जब उनका अधिकार ही नहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड क्यों हस्तक्षेप कर रहा है।”
राम मंदिर को लेकर की थी मुलाकात
-शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। 20 मिनट के मुलाकात के बाद रिजवी ने मीडिया से कहा, ”मैंने राम मंदिर बनाने को लेकर मुलाकात की है। जिस स्थान पर मंदिर है, वहां मंदिर ही बनेगा। मस्जिद किसी मंदिर को गिराकर नहीं बनाई जा सकती, इसलिए उसे अयोध्या से बाहर या दूर किसी मुस्लिम क्षेत्र में बनाने पर हमने बात की है।मैं सभी पक्षकारों से बात कर रहा हूं। सभी ने करीब-करीब मंदिर पर सहमति दे दी है। ”
पक्षकारों ने जताई थी नाराजगी
-शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी की सीएम योगी से मुलाकात के बाद कई पक्षकारों ने नाराजगी जताई थी। एक मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने अपनी बात रखते हुए कहा था- “घोटालेबाज वसीम रिजवी की औकात ही नहीं वह इस विवाद में अपनी बात रखेंगे।”
सितम्बर में की थी हिन्दू पक्षकारों से मुलाकात
-सितम्बर में वसीम रिजवी ने अयोध्या का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने पक्षकार दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास से मुलाकात की थी।
अब तक ये 4 फॉर्मूले सामने आए…
1) इलाहाबाद हाईकोर्ट
-30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था।
ये तीन पक्ष:
– निर्मोही अखाड़ा: विवादित जमीन का एक-तिहाई हिस्सा यानी राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह।
– रामलला विराजमान: एक-तिहाई हिस्सा यानी रामलला की मूर्ति वाली जगह।
– सुन्नी वक्फ बोर्ड: विवादित जमीन का बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा।
2) सुप्रीम कोर्ट
– मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “राम मंदिर विवाद का कोर्ट के बाहर निपटारा होना चाहिए। इस पर सभी संबंधित पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाएं। बातचीत नाकाम रहती है तो हम दखल देंगे।”
3) सुब्रमण्यम स्वामी
– मार्च में सुप्रीम कोर्ट के स्टैंड पर दिए बयान में स्वामी ने कहा था, “मंदिर और मस्जिद दोनों बननी चाहिए। मसला हल होना चाहिए। मस्जिद सरयू नदी के दूसरी तरफ बनना चाहिए। जबकि मंदिर वहीं बनना चाहिए, जहां अभी वो है। राम जन्मभूमि तो पूरी तरह राम मंदिर के लिए ही है। हम राम का जन्मस्थल तो नहीं बदल सकते। सऊदी अरब और मुस्लिम देशों में मस्जिद का मतलब होता है, वो जगह यहां नमाज अदा की जाए और ये काम कहीं भी हो सकता है।”
4) शिया वक्फ बोर्ड
– 8 अगस्त 2017 को शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, “अयोध्या में मस्जिद विवादित जगह से कुछ दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में बनाई जा सकती है। बाबरी मस्जिद शिया वक्फ की है लिहाजा वो ही ऐसी संस्था है, जो इस विवाद के शांतिपूर्ण हल के लिए दूसरे पक्षों से बातचीत कर सकती है। विवाद के हल के लिए बोर्ड को कमेटी बनाने के लिए वक्त चाहिए।”

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